Thursday, December 31, 2015

अरनोद थाने ने अनूठे तरीके से कम किया क्राइम. खेल-खेल में कम हो गए क्राइम. थाने ने कायम की मिसाल. कैसे मिली सफलता? देखिए इस रिपोर्ट में-

प्रतापगढ़ के एक पुलिस थाने ने अनूठे तरीके से क्राइम कम करने में सफलता हांसिल की है... इस थाने बिना लोगों में खौफ पैदा किए कैसे कम किया क्राइम? देखिए इस खास रिपोर्ट में--

प्रतापगढ़ के एक पुलिस थाने ने अनोखे तरीके से क्राइम पर लगाम लगाने में सफलता हांसिल की है. यह थाना है "अरनोद" का... अरनोद थाना क्षेत्र क्राइम के लिए कुख्यात था. यह वही इलाका है, जहाँ कुख्यात फिरौती गिरोह सक्रीय रहते थे... जो तस्करी और फायरिंग के कभी अव्वल था.. लेकिन अब यहाँ उल्लेखनीय बदलाव आया है... इस बदलाव को लाने के लिए पुलिस ने जो तरीका अपनाया...वह वाकय में मिसाल है... थानाधिकारी और RPS अधिकारी गोपीचंद मीणा ने खेल-खेल में ही क्राइम कर दिए... जो काम पुलिस की सख्ती नहीं कर सकी, वह काम महज़ चंद दिनों में खेल के माध्यम से हो गया. हर सुबह और शाम इलाके के लोगों को वोलिबोल खेलने के लिए बुलाया जाता... शुरू में तो लोग थाने में पुलिस अधिकारीयों के साथ खेलने में हिचकिचाए--- लेकिन फिर सब आम होता चला गया. लोगों की संवेदना पुलिस के साथ बेहतर होती चली गई.. नतीजा यह हुआ कि लोग क्राइम करने में ही संकोच करने लगे. यही नहीं, कोई भी बात हो पुलिस के साथ आसानी से साझा करने लगे... अब हाल यह है कि गुज़रे एक साल में फिरौती-फायरिंग का क्राइम लगभग पूरा खत्म हो गया है... थानाधिकारी का कहना है कि खेल सभी के जीवन का अहम हिस्सा है... खेल के माध्यम से लोग उनके करीब आए, और क्राइम करने में शर्मिंदा महसूस करने लगे.. साथ ही अपने मन की बात शेयर भी करने लगे... अगर सभी पुलिस थाने इस तरह खेल-खेल में आम जन से करीब आकर रिलेशन बेहतर करें, तो निश्चित तौर पर क्राइम में कमी आ सकती है... जो काम रोप का डंडा नहीं कर सका, वह काम अरनोद पुलिस की पोजिटिव पहल ने करके दिखाया है...

प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना साबित हुई फिसड्डी. किसान में सूखे के मारे मचा हाहाकार. मुआवजे के लिए क्या फिर सड़कों पर उतरेंगे किसान?

प्रतापगढ़ में प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना फिसड्डी साबित होती दिख रही है. एक तरह किसान सूखे के मारे हाहाकार कर रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन चैन की नींद सो रहा है...

प्रतापगढ़ में इस वर्ष बारिश कम होने से सुखा पैदा हो गया है. बारिश कम होने से जलस्रोतों में पानी कम है, तो सिंचाई के लिए किसान महंगे टेंकर पर निर्भर है. क्योंकि सिंचाई के लिए चलाई जा रही योजना का भी कोई फायदा नहीं मिल रहा है... आंकडो पर नज़र डाली जाए तो -- 600 हेक्टेयर के अगेंस्ट 150 हेक्टयेर, फव्वारे के 2150 हेक्टयेर के अगेंस्ट 1000 हेक्टयेर, मसाला फसलों में 50 हेक्टेयर के अगेंस्ट 35 हेक्टयेर ही पूरे हुए हैं. कई गाँव ऐसे हैं, जहाँ सूखे से फसलें खराब हो रही हैं. वहाँ अभी तक विभाग का कोई नुमाइंदा नहीं पहुंचा है... सूखे के पीछे कम बारिश और अवैध जल दोहन को कारण माना जा रहा है... इधर प्रशासन की सुस्ती ने चिंता और बढ़ा दी है... ऐसी हालत में जब किसान सूखे की मार से परेशान हों, प्रशासन को आगे आकार सहायता करनी चाहिए... नहीं तो एक बार फिर खराबा होगा और किसान मुआवजे के लिए सड़कों पर उतरेंगे...

जवाबदेही यात्रा प्रतापगढ़ पहुंची. पंचायत समिति कार्यालय के सामने विशेष कार्यक्रम का आयोजन. सरकार अधिकारीयों के खिलाफ जवाबदेही का नियम बनाए जाने की मांग.

जवाबदेही यात्रा प्रतापगढ़ पहुंची जहाँ उन्होंने पंचायत समिति कार्यालय के सामने विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम से हर किसी को मोह लिया. कार्यक्रम में भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ थी, जिसे नाच-गा कर और नाटक के माध्यम से तेज किया गया. आयोजन के चारों ओर लोगों का जमावड़ा लगा. यात्रा में आए लोगों ने मांग की है कि सरकार अधिकारीयों के खिलाफ जवाबदेही का नियम बनाए. जिसके अंतर्गत काम नहीं होने पर उसका कारण वे बताएं. यह यात्रा 1 दिसंबर को जयपुर से शुरू हुई है जो सभी जिलों में जा रही है. हर जिले में तीन-तीन दिन बिताए जा रहे हैं. यात्रा में 100 लोग शामिल हैं. मांग यह भी है कि कर्मचारियों पर काम न होने की स्थिति में जुर्माना लगाया जाए.

Friday, December 25, 2015

प्रतापगढ़ में कंप्यूटर शिक्षा योजना ने तोडा दम. 64 स्कूलों में दी जानी थी कंप्यूटर शिक्षा. अध्यापकों और संस्था प्रधानों की लापरवाही से बदहाल हुई व्यवस्था. कई स्कूलों में धुल फांक रहे कंप्यूटर.





ग्रामीण इलाको में बच्चों को कंप्यूटर की बेहतर शिक्षा देने की सरकारी योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही है. प्रतापगढ़ से आई इस रिपोर्ट को देखिए. और जानिये किस तरह से कंप्यूटर शिक्षा योजना का दम ही घुट गया है.

प्रतापगढ़ जिले के आदिवासी और ग्रामीण बच्चों को कंप्यूटर से जोड़ने की कवायद ने दम तोड़ दिया है. सरकार की ओर से आई.सी.टी. योजना के अंतर्गत 64 स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा देने का प्रावधान था. करोड़ों रूपए खर्च कर स्कूलों में कंप्यूटर भिजवाए गए. योजना के तहत तीन फेज़ में काम होना था. प्रथम फेज़ में 24 स्कूल, दूसरे फेस में 30 स्कूल तो वहीं तीसरे फेस में 10 स्कूल को चयनित किए गए थे. पहले और दूसरे फेज़ में पहले कॉन्ट्रैक्ट बेस पर शिक्षा दी जानी थी, उसके बाद विद्यालय को अपने स्तर पर यह शिक्षा बच्चों को देनी थी, इसके लिए विद्यालय को मौजूदा शिक्षकों का उपयोग करना था. तो कहीं तीसरे फेज़ में भी यह जिम्मा स्कूल का ही था. लेकिन जैसे ही ज़िम्मा स्कूलों पर आया, कंप्यूटर शिक्षा के बुरे दिन शुरू हो गए. महीनों बाद जब कंप्यूटर कक्षों के दरवाज़े खोले गए तो घटिया तस्वीर निकल कर आई. कंप्यूटर धुल फांक रहे थे, मकड़ी के जाले बने हुए थे... यह कंप्यूटर अब उपयोग में ना आने और रख-रखाव ना होने की वजह से खराब हो गए हैं.

सरकार की कोई भी योजना हो --शुरुआत में जोर शोर से प्रचार होता है. उसके बाद में धीरे-धीरे योजनाओं का दम घुटने लगता है.संस्था प्रधानों की लापरवाही के चलते कंप्यूटर शिक्षा का कोई फायदा आदिवासी बच्चों को नहीं मिल रहा है---ऐसे में योजना पर फूंके गए लाखों सरकारी रूपए अब फालतू ही नज़र आ रहे हैं.

प्रतापगढ़ की लुटेरी दुल्हन की कहानी ! शादी के बाद हमेशा के लिए पति को कहा अलविदा. पति को लगाईं पौने दो लाख रूपए की चपत. 90 हजार रूपए में हुआ था शादी का सौदा. खास रिपोर्ट.






उस विकलांग ने भी शादी के बाद सुनहरे जीवन के सपने संजोय थे, लेकिन दुल्हन ने सब कुछ बर्बाद कर दिया... एक अनजान महिला से सौदा कर शादी करना युवक को महंगा पड़ गया! मामला प्रतापगढ़ से है जहां एक दुल्हन अपने पति को पौने दो लाख रुपए की चपत लगा कर हमेशा के लिए अलविदा कह गई...

राजस्थान के प्रतापगढ़ के मानपुरा में एक युवक के साथ शादी के बाद धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. स्थानीय युवक राजेश गायरी ने 90 हजार रुपए देकर महाराष्ट्र की आकोला की रहने वाली कल्पना गायकवाड से शादी रचाई थी. यह सौदा राजेश अपनी जान-पहचान वाले मध्यप्रदेश के नारायाणगढ़ निवासी भागीरथ पाटीदार ने तय करवाया था. सौदे के मुताबिक 40 हजार रुपए शादी के पहले और बाकी 50 हजार रुपए शादी के बाद दिए गए. स्थानीय मंदिर में शादी हुई और कल्पना राजेश के साथ रहने लगी. शादी के बाद कल्पना ने अच्छे व्यवहार से सभी को प्रभावित भी रखा.

10 दिन बाद अचानक कल्पना ने माँ के बीमार होने का बहाना बनाया और इलाज के नाम पर 40 हजार रूपए और लेकर घर चली गई. जब महीने भर तक पत्नी घर नहीं लौटी तो पति ने फोन किया. पत्नी के कहने पर पति ने उसके बेंक खाते में 700 रूपए किराए के जमा भी कर दिए.. लेकिन फिर पत्नी ने आने से इनकार कर दिया. और यह तक कह डाला कि --"अब से मुझे कभी फोन मत करना. मैं अब कभी नहीं आऊंगी. तुझे जो करना है कर ले..." यह सुनते ही तो मानों राजेश के पैरों तले जमीन खिसक गई.


राजेश को यह भी नहीं मालूम कि कल्पना के घर का पता क्या है, वो कहाँ रहती है, उसके माता-पिता कौन है और उसका चरित्र कैसा है!!! युवक भागीरथ ने राजेश को बस कल्पना की फोटो दिखाई थी... कुछ यूँही सौदा तय हुआ था.


कहानी का सबसे दुखद पहलु यह है कि राजेश अपंग है और माँ विधवा. माँ पास के ही सरकारी स्कूल में चपरासी है और 1000 रूपए महीना तनख्वाह से घर बार बमुश्किल चलता है... माँ ने अपने विकलांग बेटे की शादी के लिए सारा पैसा गाँव के लोगों से ही उधार लिया था.. जो अब रोज घर मांगने आ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक 90 हजार शादी के, 40 हजार पीहर भेजते समय, और 50 हजार रूपए शादी में खर्च हुए थे.. इस तरह कुल 1 लाख 80 हजार रूपए खर्च हो गए... यह सभी पैसे उधर के ही थे... अब भुलिभाई और राजेश के सामने यह पैसा चुकाने का भी संकट मंडरा रहा है... राजेश ने भागीरथ, कल्पना और उसके अन्य साथी देवचंद के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. देवचंद इगले ने अपने आप को कल्पना का रिश्तेदार बताया था.

शादी जीवन का सबसे अहम निर्णय होता है.छोटी-सी चूक भी जिंदगी बर्बाद कर सकती है. ज़रूरत है कि लोग सौदे वाली शादियों से बचें... और सोच-समझ कर फ़ैसला लें. बहरहाल राजेश को पत्नी का इंतज़ार है...!

पुलिस ने सुलझाई ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी. चचेरे भाई की निकले आरोपी. जंगल में किया था युवक पर हमला. कैसे किया पुलिस ने खुलासा? देखिए इस रिपोर्ट में



प्रतापगढ़ पुलिस ने जंगल के सुनसान इलाके में हुए ब्लाइंड मर्डर केस का पर्दाफाश कर लिया है... पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरी गुत्थी सुलझा ली है..
मामला प्रतापगढ़ के सुहागपुरा थाना क्षेत्र का है. बड़ीलाक में वन क्षेत्र में युवक की हत्या की गई थी. मामले में पुलिस ने मृतक के चचेरे भाइयों को गिरफ्तार किया है. पारिवारिक रंजिश के चलते दोनों ने हत्या करना कुबूल किया है. sp ने बताया कि पीपली का पठार जंगल में सूने स्थान पर 15 दिसंबर को देवी लाल मीणा और वालाराम मीणा चुपना मजदूरी कर मोटरसाइकिल पर गांव आ रहे थे. उन पर अज्ञात लोगों ने हमला किया था. इसमें देवीलाल की उपचार के दौरान मौत हो गई थी. थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल sp के नेतृत्व में तीन टीमें गठित की गई. सामने आया कि पारिवारिक रंजिश के चलते चचेरे भाई आसूराम मीणा और अशोक मीणा ने हमला किया था .. पुलिस ने दोनों को पकड़कर कड़ी पूछताछ की. पूछताछ में आरोपियों ने पीपली का पठार वन क्षेत्र में सुनियोजित तरीके से घटना को अंजाम देना कुबूल किया. दोनों भाइयों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें दो दिन के पुलिसिया रिमांड पर भेज दिया गया.,..

हमले को लेकर पहले से योजना बनाई गई थी. आरोपियों को पता था कि देवीलाल और बालाराम बाइक से आते हैं. घटना के लिए उन्होंने जंगल और शाम का समय चुना... बहरहाल आरोपी पुलिस गिरफ्त में है. उम्मीद है मृतक को सही न्याय मिलेगा.

गौतस्कारों की जमानत खारिज. पीपलखूंट थाना पुलिस से जुड़ा है मामला. आरोपी कय्यूम मुसलमान और बहादुर बंजारा ने जमानत के लिए किया था आवेदन.

प्रतापगढ़ के जिला एवं सेशन कोर्ट ने गौतस्कारों की जमानत खारिज करने के आदेश दिए हैं...मामला पीपलखूंट थाना पुलिस से जुड़ा है. पुलिस ने 17 दिसम्बर को गौतस्कारी कर रहे दो युवकों को पिकअप समेत गिरफ्तार किया था. आरोपियों से चार गाय के बछड़े मुक्त करवाए गए थे. आरोपी कय्यूम मुसलमान और बहादुर बंजारा ने जमानत के लिए आवेदन किया था. लेकिन कोर्ट ने अब इसे खारिज कर दिया है... कोर्ट ने लोक अभियोजक तरुण दास बैरागी और अधिक्वक्ता रमेश शर्मा ने जमानत होने का विरोध किया था... ये आरोपी इन गायों को एमपी से गुजरात ले जा रहे थे. एमपी में पुलिस ने इन्हें छोड़ दिया लेकिन राजस्थान पुलिस से बच नहीं सके...